एक बच्चे का सपना

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अगर आप कोई सपना देखते हैं तो आपको अपने ऊपर पूरा यकीन होना चाहिए की आप उसे पूरा कर सकते है.
लोग आप पर शक करते हैं, क्यूंकि वो आपके आज को देखकर आपके कल का अंदाजा लगाते है .
लेकिन अगर आपके इरादे मजबूत हैं तो आप उन सब लोगों को गलत साबित कर सकते हैं .

आज की कहानी भी एक ऐसे ही लड़के की हैं जिसने अपने से बड़े और समझदार माने जाने वाले लोगों को गलत साबित कर के दिखाया, ये कहानी आप सभी को जरुर देखनी चाहिए, जिससे की आप अपने जीवन में कुछ अच्छा कर सकें …

एक शहर (City ) में एक छोटा लड़का (young boy) रहा करता था .
उसके पिताजी शहर के ही एक अमीर सेठ के घर पर काम करते थे.
सेठ बहुत अमीर था और उसके पास एक से एक लक्ज़री गाड़ियां थी .

लड़का अपने पिता को दिन भर उन गाड़ियों की साफ़ सफाई करते देखता और सोचता की,
मेरे पिता जी इतनी मेहनत करते हैं फिर भी उन्हें वो मान सम्मान नहीं मिलता जो लोग सेठ को देते हैं.

बचपन सपना देखने की उम्र होती है और जवानी उसे सच करने की और ऐसे ही उस लड़के ने भी सपना (Dream) देखना शुरू कर दिया कि एक दिन उसके पास भी इतनी ही दौलत होगी और गाड़ियों की एक लम्बी रेंज होगी, उसे भी वो मान सम्मान मिलेगा जो उस सेठ को मिलता है .

फिर एक दिन लड़के के स्कूल में उसके टीचर ने सभी बच्चों से एक लेख लिखने को कहा जिसमे उन्हें बताना था की वो बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं,
उस लड़के ने रात भर जागकर एक बहुत ही बेहतरीन लेख लिखा और साथ ही अपने सपने (dream) को उसमे पूरी तरह बताते हुए उसमे घर और गाड़ियों की फोटो भी बना दी.
और अगले दिन अपने टीचर को अपना लेख दे दिया.

शिक्षक ने सभी कापियां जांचने के बाद रिजल्ट सुनाया तो लड़के को अजीब लगा क्योंकि उन्होंने उस लड़के द्वारा मेहनत से लिखे गये उस लेख के लिए कोई मार्क्स नहीं दिए थे और उस पर बड़े अक्षरों से फेल लिख दिया .

जब लड़के ने टीचर से वजह पूछी तो टीचर ने कहा – बेहतर होता तुम कोई छोटा मोटा लेख लिखते क्योंकि तुमने जो लिखा है वो पूरी तरह असम्भव है .
तुम लोगो के पास कुछ नहीं है इसलिए ऐसा सम्भव ही नहीं लेकिन फिर भी तुम चाहो तो मैं तुम्हे दूसरा मौका दे सकता हूँ | तुम इस लेख को दुबारा लिखो और कोई वास्तविक लक्ष्य (Real Goal) बना लो . मैं तुम्हे दोबारा नंबर देने के बारे में फिर से सोच सकता हूँ .

लड़का उस कॉपी को लेकर घर गया और उस पर काफी सोचा लेकिन उसे पूरी रात नींद नहीं आई अगले दिन वो टीचर के पास जाकर बोला आपको जो करना हो कर सकते है लेकिन मेरा लेख यही है और मैं इसे नहीं बदलना चाहता.
अगर आप मुझे फेल करना चाहते है तो कर दीजिये लेकिन मैं अपने सपने को नहीं बदलूँगा .

 

बीस साल बाद वहीँ टीचर एक सम्मेलन में मंच पर खड़े एक बेहद कामयाब नौजवान के भाषण को बड़े गौर से सुन रहा था, भाषण ख़तम होने के बाद नौजवान नीचे आया, उसने टीचर के पैर छुए और उन्हें अपना परिचय दिया ,
ये वहीँ छोटा लड़का था जिसे कभी टीचर ने फेल किया था आज वो एक कामयाब बिजनेसमैन बन चूका था जिसके पास हर वो चीज थी जो उसने बचपन में अपने लेख में लिखी थी .

तो देखा दोस्तो ये कोई जरुरी नहीं की
कोई आदमी जो आपसे बड़ा या आपसे समझदार हो आपको सही तरीके से जज कर सकता है.
केवल आप खुद अपनी क्षमता को पहचानते हैं, इस लिए स्वामी विवेकानंद की बात याद करो .
उठो जागो और आगे बढ़ो, तब तक मत रुको जब तक अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर लेते.

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