Motivational Stories in Hindi

छोटी छोटी बातें…..
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घर में इन छोटी छोटी बातों का ध्यान रखनें से आपकी कई समस्याओं का अंत हो सकता है..

रात में सोने से पहले रसोई में बाल्टी भरकर रखें इससे क़र्ज़ से शीघ्र मुक्ति मिलती है और यदि बाथरूम में बाल्टी भरकर रखेंगे तो जीवन में उन्नति के मार्ग में बाधा नही आयेगी।

सूर्यास्त के समय किसी को भी दूध, दही या प्याज माँगने पर ना दें इससे घर की बरकत समाप्त हो जाती है।

छत पर कभी भी अनाज या बिस्तर ना धोएं, हाँ आप सुखा सकते है इससे आपके ससुराल से सम्बन्ध खराब होने लगते हैं।

फल के छिलके कूडादान में ना डालें बल्कि बाहर फेंकें इससे मित्रों से लाभ होगा।

महीने में एक बार किसी भी दिन घर में चीनी के साथ मिश्री डाल कर खीर जरुर बनाएं व उसे पुरे परिवार सहित एक साथ खाएं अर्थात जब पूरा परिवार घर में इकट्ठा हो उसी समय खीर खाएं तो माँ लक्ष्मी की जल्दी कृपा होती है। व सभी में प्यार बना रहता है।

महीने में एक बार अपने कार्यालय/ दुकान में भी कुछ मीठा जरुर ले जाएँ उसे अपने साथियों के साथ या अपने नौकरों के साथ मिलकर खाए तो धन लाभ होगा।

घर के मुख्य द्वार के पास कभी भी कूड़ादान (Dustbin) ना रखें इससे आपके पड़ोसी ही आपके शत्रु हो जायेंगे।

वृहस्पतिवार के दिन घर में कोई भी पीली वस्तु अवश्य खाएं हरी वस्तु ना खाएं तथा बुधवार के दिन हरी वस्तु खाएं लेकिन पीली वस्तु बिलकुल ना खाएं इससे सुख समृद्धि बड़ेगी।

रात को झूठे बर्तन ना रखें इसे पानी से धो कर रख सकते है धन हानि रुकेगी।

नहाने के बाद गीले तौलिये का प्रयोग ना करें इससे संतान जिद्दी हो जाती है व परिवार से अलग होने लगती है। रोज़ साफ़ सुथरा और सूखा तौलिया ही प्रयोग करें ।

कभी भी पूरा परिवार एक साथ घर से ना निकलें आगे पीछे जाएँ इससे यश की वृद्धि होगी।

ये कुछ उपाय है जो हमारे घर की छोटी मोटी वास्तु ठीक कर सकते है जिसे हम सभी आसानी से अपने अपने घर में कर सकते है। आप कर सकते हे तो जरूर आजमाकर देखे और अगर आपको भी फ़ायदा पहुचे तो अपने निकटवर्ती लोगो को भी इस बारे में जरूर बताये। अच्छी बातें पुष्प की खुशबु की तरह फैलाना चाहिये। और व्यर्थ की बातों को बदबू की तरह समाप्त कर देना चाहिये।


रिश्तें…..
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रिश्तों को पेपर नैपकिन कभी मत समझो..
की काम में लिया कूड़ेदान मैं फैंक दिया।

रिश्तों को जेवर भी मत समझो..
की दिखाने को पहना, अलमारी के लॉकर में बंद कर दिया और अगर आवश्यकता पडी तो याद कर लिया, नहीं तो दिमाग के किसी कोने में बंद कर दिया।

रिश्तों को जूता भी मत समझो..
की कई दिन नहीं पहनो तो, गंदा ही पड़े रहने दो और अगर पहनना हो तो, पोलिश लगा कर चमका दिया। पर हां अगर काम नहीं भी आये तो भी हमेशा चमका कर जरूर रखो।

रिश्तों को सेफ्टी पिन जैसा भी मत समझो..
उसकी वैसे कद्र नहीं करो और कपड़ा फट जाए तो ढूंढते रहो।

रिश्तों को नाखून भी ना समझो..
की थोड़े से खराब लगने लगें तो तुरंत काट कर फैंक दिया।

रिश्तों को तो हमेशा….

हीरे की कीमती अंगूठी सा समझो..
कही अगर गंदी हो भी जाए तो,
साफ़ कर के फ़ौरन वापस पहन लो।

रेशम का कीमती रुमाल सा समझो,
कडवाहट से गंदे होने लगे तुरंत साफ़ करो।

अपने बालों सा रखो ताकि बार बार संवारते रहो।
खुद के चेहरा सा खूबसूरत बना कर रखो।
उस पर प्यार की क्रीम और विश्वास का पाऊडर लगाओ।

अच्छे व्यवहार से उनका मेकअप करो,
रिश्तों को जितना हो सके और सुन्दर बनाओ।

क्योंकि रिश्तें हे तो हम हे हमारी पहचान है,
ये रिश्तें ही हे जो हमको जीना सिखाते हैं।


माँ-बाप…. तो होते ही ऐसे हे !
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आज कुछ करने का मन नहीं..

लगता है कही चली जाऊँ अकेले ही किसी वादियो में। जहाँ सिर्फ शान्ति हो और कोई परेशान करने वाला न हो। न घर के काम ना बहार के। शायद एक माँ के काम की ओवरडोज़ या कुछ अपना करने का मन। साल बीते चले गये पर शायद अकेला रहना का मौका नहीं मिल पाया। ऐसी ही होती है एक माँ की ज़िन्दगी , हमेशा हर दिन रोज़ नयी कहानी लिए। कभी किसी के लिए कभी किसी के लिए और यही करते करते दिन और साल निकल जाते है।

एक दिन मुझे भी मौका मिला अकेले रहने का। बच्चे एक बर्थडे पार्टी में गए और मैं और मेरे पतिदेव फ्री कुछ घंटो के लिए। सोचा चलो घूम आये कही जैसे शादी के पहले जाया करते थे। फ्री हो के, बिना कोई चिंता किये और हमेशा के तरह हम निकल पडे एक चाट कार्नर की तलाश में , पर इस बार सिर्फ हम दो ही थे। एक छोटा सा पर्स लटकाये अपने दोनों हाथ हवा में हिलाई जा रहे थे।

कैसा लगता है जब आपको कोई पानी की बोतले नहीं ली जानी पड़ती हो, पर्स में कोई टॉफ़ी चॉकलेट नहीं रखनी पड़ती हो। मुझे भी बहुत अच्छा लगा आखिर इतने सालों में ऐसा मौका आया जो बहुत कम होता है।

आखिरकार पहुचे हम एक पुरानी दुकान में, आर्डर किया सब कुछ जो पसंद था। बस फिर और क्या हम दो और हमारी दो प्लेट। सोचा कुछ घंटे बिताएंगे कुछ अनोखी बातें करके और पुराने याद ताज़ा करेंगे। पर यह क्या बात घूम फिर के बच्चॊ पर।

समझ नहीं आया और पसंदीदा खाना भी फीका लगा। शायद हम दोनों उनको याद कर रहे थे। चाहे कोई परेशान करने वाला नहीं था पर फिर भी हम वह आधे घंटे से ज्यादा नहीं बैठ पाए। शायद इसी को माँ बाप बन जाना कहते है।

फिर क्या था आधे घंटे में हम वापस घर आ गए। अभी भी टाइम था बच्चो के वापस आने में। सोचा थोड़ी देर अपना मनपसंद टीवी शो देख लेते है पर यह क्या उंगलियां हमेशा कार्टून चैनल पर आकर अटक जा रही थी। टीवी भी देखा नहीं गया। मन बेचैन और वो शांति उस दिन सबसे बड़ी अशांति लग रही थी।

हम बेसब्री से उनके वापस आने का इंतज़ार करने लगे की वह आये थो रौनक आये घर में वापस। शायद वह अकेलापन मानो काट रहा था। और जैसे ही वह लोग वापस आये हमारी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा जैसे कितने सालों में मिल रहे हो।

पर उस दिन एक बात समझ में आ गयी की मैं चाहे कितने भी अकेले रहने की कामना करती रहूं पर रह नहीं सकती और शायद यही प्यार है एक माँ का अपने बच्चॊ से।

 


 

देने वाला कौन…….? ?
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आज का ये शीर्षक देने वाला कौन ? बहुत ही महत्वपूर्ण है

आज हमने भंडारे में भोजन करवाया, आज हमने ये बांटा, आज हमने वो दान किया ! हम अक्सर ऐसा कहते और मानते हैं इसी से सम्बंधित एक अविस्मरणीय कथा सुनिए..

एक लकड़हारा रात दिन लकड़ियां काटता, मगर कठोर परिश्रम के बावजूद उसे आधा पेट भोजन ही मिल पाता था। एक दिन उसकी मुलाकात एक साधु से हुई। लकड़हारे ने साधु से कहा कि जब भी आपकी प्रभु से मुलाकात हो जाए, मेरी एक फरियाद उनके सामने रखना और मेरे कष्ट का कारण पूछना।

कुछ दिनों बाद उसे वह साधु फिर मिला, लकड़हारे ने उसे अपनी फरियाद की याद दिलाई तो साधु ने कहा कि प्रभु ने बताया हैं कि लकड़हारे की आयु 60 वर्ष हैं और उसके भाग्य में पूरे जीवन के लिए सिर्फ पाँच बोरी अनाज हैं, इसलिए प्रभु उसे थोड़ा अनाज ही देते हैं ताकि वह 60 वर्ष तक जीवित रह सके।

समय बीता, साधु उस लकड़हारे को फिर से मिला तो लकड़हारे ने कहा – ऋषिवर ! अब जब भी आपकी प्रभु से बात हो तो मेरी यह फरियाद उन तक पहुँचा देना कि वह मेरे जीवन का सारा अनाज एक साथ दे दें, ताकि कम से कम एक दिन तो मैं भरपेट भोजन कर सकूं। अगले दिन साधु ने कुछ ऐसा किया कि लकड़हारे के घर ढ़ेर सारा अनाज पहुँच गया। लकड़हारे ने समझा कि प्रभु ने उसकी फरियाद कबूल कर उसे उसका सारा हिस्सा भेज दिया हैं।

उसने बिना कल की चिंता किए, सारे अनाज का भोजन बनाकर फकीरों और भूखों को खिला दिया और खुद भी भरपेट खाया। लेकिन अगली सुबह उठने पर उसने देखा कि उतना ही अनाज उसके घर फिर पहुंच गया हैं। उसने फिर गरीबों को खिला दिया। फिर उसका भंडार भर गया। यह सिलसिला रोज-रोज चल पड़ा और लकड़हारा लकड़ियां काटने की जगह गरीबों को खाना खिलाने में व्यस्त रहने लगा।

कुछ दिन बाद वह साधु फिर लकड़हारे को मिला तो लकड़हारे ने कहा – ऋषिवर ! आप तो कहते थे कि मेरे जीवन में सिर्फ पाँच बोरी अनाज हैं, लेकिन अब तो हर दिन मेरे घर पाँच बोरी अनाज आ जाता हैं। साधु ने समझाया, तुमने अपने जीवन की परवाह ना करते हुए अपने हिस्से का अनाज गरीब व भूखों को खिला दिया, इसीलिए प्रभु अब उन गरीबों के हिस्से का अनाज तुम्हें दे रहे हैं।

कथासार – किसी को भी कुछ भी देने की शक्ति हम में है ही नहीं, हम देते वक्त ये सोचते हैं, की जिसको कुछ दिया तो ये मैंने दिया ! दान, वस्तु, ज्ञान, यहाँ तक की अपने बच्चों को भी कुछ देते दिलाते हैं तो कहते हैं मैंने दिलाया। वास्तविकता ये है कि वो उनका अपना है आप को सिर्फ परमात्मा ने निहित मात्र बनाया हैं उन तक उनकी जरूरतों तक पहुचाने के लिये तो निहित होने का घमंड कैसा ?

दान किए से जाए दुःख, दूर होएं सब पाप ।
राम आकर द्वार पे, दूर करें संताप ।


 

छोटी छोटी बातें…..
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घर में इन छोटी छोटी बातों का ध्यान रखनें से आपकी कई समस्याओं का अंत हो सकता है..

रात में सोने से पहले रसोई में बाल्टी भरकर रखें इससे क़र्ज़ से शीघ्र मुक्ति मिलती है और यदि बाथरूम में बाल्टी भरकर रखेंगे तो जीवन में उन्नति के मार्ग में बाधा नही आयेगी।

सूर्यास्त के समय किसी को भी दूध, दही या प्याज माँगने पर ना दें इससे घर की बरकत समाप्त हो जाती है।

छत पर कभी भी अनाज या बिस्तर ना धोएं, हाँ आप सुखा सकते है इससे आपके ससुराल से सम्बन्ध खराब होने लगते हैं।

फल के छिलके कूडादान में ना डालें बल्कि बाहर फेंकें इससे मित्रों से लाभ होगा।

महीने में एक बार किसी भी दिन घर में चीनी के साथ मिश्री डाल कर खीर जरुर बनाएं व उसे पुरे परिवार सहित एक साथ खाएं अर्थात जब पूरा परिवार घर में इकट्ठा हो उसी समय खीर खाएं तो माँ लक्ष्मी की जल्दी कृपा होती है। व सभी में प्यार बना रहता है।

महीने में एक बार अपने कार्यालय/ दुकान में भी कुछ मीठा जरुर ले जाएँ उसे अपने साथियों के साथ या अपने नौकरों के साथ मिलकर खाए तो धन लाभ होगा।

घर के मुख्य द्वार के पास कभी भी कूड़ादान (Dustbin) ना रखें इससे आपके पड़ोसी ही आपके शत्रु हो जायेंगे।

वृहस्पतिवार के दिन घर में कोई भी पीली वस्तु अवश्य खाएं हरी वस्तु ना खाएं तथा बुधवार के दिन हरी वस्तु खाएं लेकिन पीली वस्तु बिलकुल ना खाएं इससे सुख समृद्धि बड़ेगी।

रात को झूठे बर्तन ना रखें इसे पानी से धो कर रख सकते है धन हानि रुकेगी।

नहाने के बाद गीले तौलिये का प्रयोग ना करें इससे संतान जिद्दी हो जाती है व परिवार से अलग होने लगती है। रोज़ साफ़ सुथरा और सूखा तौलिया ही प्रयोग करें ।

कभी भी पूरा परिवार एक साथ घर से ना निकलें आगे पीछे जाएँ इससे यश की वृद्धि होगी।

ये कुछ उपाय है जो हमारे घर की छोटी मोटी वास्तु ठीक कर सकते है जिसे हम सभी आसानी से अपने अपने घर में कर सकते है। आप कर सकते हे तो जरूर आजमाकर देखे और अगर आपको भी फ़ायदा पहुचे तो अपने निकटवर्ती लोगो को भी इस बारे में जरूर बताये। अच्छी बातें पुष्प की खुशबु की तरह फैलाना चाहिये। और व्यर्थ की बातों को बदबू की तरह समाप्त कर देना चाहिये।

 


राजा का स्वप्न ……..
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एक राजा ने एक दिन स्वप्न देखा कि कोई परोपकारी साधु उससे कह रहा है कि बेटा ! कल रात को तुझे एक विषैला सर्प काटेगा और उसके काटने से तेरी मृत्यु हो जायेगी। वह सर्प अमुक पेड़ की जड़ में रहता है, पूर्व जन्म की शत्रुता का बदला लेने के लिए वह तुम्हें काटेगा। प्रातःकाल राजा सोकर उठा और स्वप्न की बात पर विचार करने लगा।

धर्मात्माओं को अक्सर सच्चे ही स्वप्न हुआ करते हैं। राजा धर्मात्मा था, इसलिए अपने स्वप्न की सत्यता पर उसे विश्वास था। वह विचार करने लगा कि अब आत्म- रक्षा के लिए क्या उपाय करना चाहिए ? सोचते- सोचते राजा इस निर्णय पर पहुँचा कि मधुर व्यवहार से बढ़कर शत्रु को जीतने वाला और कोई हथियार इस पृथ्वी पर नहीं है। उसने सर्प के साथ मधुर व्यवहार करके उसका मन बदल देने का निश्चय किया।

संध्या होते ही राजा ने उस पेड़ की जड़ से लेकर अपनी शय्या तक फूलों का बिछौना बिछवा दिया, सुगन्धित जलों का छिड़काव करवाया, मीठे दूध के कटोरे जगह- जगह रखवा दिये और सेवकों से कह दिया कि रात को जब सर्प निकले तो कोई उसे किसी प्रकार कष्ट पहुँचाने या छेड़- छाड़ करने का प्रयत्न न करे।

रात को ठीक बारह बजे सर्प अपनी बाँबी में से फुसकारता हुआ निकला और राजा के महल की तरफ चल दिया। वह जैसे- जैसे आगे बढ़ता गया, अपने लिए की गई स्वागत व्यवस्था को देख- देखकर आनन्दित होता गया।कोमल बिछौने पर लेटता हुआ मनभावनी सुगन्ध का रसास्वादन करता हुआ, स्थान- स्थान पर मीठा दूध पीता हुआ आगे बढ़ता था।

क्रोध के स्थान पर सन्तोष और प्रसन्नता के भाव उसमें बढ़ने लगे। जैसे- जैसे वह आगे चलता गया, वैसे ही वैसे उसका क्रोध कम होता गया। राजमहल में जब वह प्रवेश करने लगा तो देखा कि प्रहरी और द्वारपाल सशस्त्र खड़े हैं, परन्तु उसे जरा भी हानि पहुँचाने की चेष्टा नहीं करते। यह असाधारण सौजन्य देखकर सर्प के मन में स्नेह उमड़ आया।

सद्व्यवहार, नम्रता, मधुरता के जादू ने उसे मन्त्र- मुग्ध कर लिया था। कहाँ वह राजा को काटने चला था, परन्तु अब उसके लिए अपना कार्य असंभव हो गया। हानि पहुँचाने के लिए आने वाले शत्रु के साथ जिसका ऐसा मधुर व्यवहार है, उस धर्मात्मा राजा को काटूँ तो किस प्रकार काटूँ ? यह प्रश्न उससे हल न हो सका। राजा के पलंग तक जाने तक सर्प का निश्चय पूर्ण रूप से बदल गया। सर्प के आगमन की राजा प्रतीक्षा कर रहा था। नियत समय से कुछ विलम्ब में वह पहुँचा।

सर्प ने राजा से कहा- हे राजन् ! मैं तुम्हें काटकर अपने पूर्व जन्म का बदला चुकाने आया था, परन्तु तुम्हारे सौजन्य और सद्व्यवहार ने मुझे परास्त कर दिया। अब मैं तुम्हारा शत्रु नहीं मित्र हूँ। मित्रता के उपहार स्वरूप अपनी बहुमूल्य मणि मैं तुम्हें दे रहा हूँ। लो इसे अपने पास रखो। इतना कहकर और मणि राजा के सामने रखकर सर्प उलटे पाँव अपने घर वापस चला गया।

भलमनसाहत और सद्व्यवहार ऐसे प्रबल अस्त्र हैं, जिनसे बुरे- से स्वभाव के दुष्ट मनुष्यों को भी परास्त होना पड़ता है।


हल्दी का दूध…….
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हल्‍दी वाला दूध बहुत फायदेमंद हैं। दूध जहां कैल्शियम से भरपूर होता है वहीं दूसरी तरफ हल्‍दी में एंटीबायोटिक होता है। दोनों ही आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत लाभकारी होते हैं। और अगर दोनों को एक साथ मिला लिया जाये तो इनके लाभ दोगुना हो जायेगें। आइए हल्‍दी वाले दूध के ऐसे फायदों को जानकर आप इसे पीने से खुद को रोक नहीं पायेगें ।

हल्दी वाला दूध पीने के 7 लाभ…

1 सांस संबंधी समस्‍याओं में लाभकारी : हल्दी में एंटी-माइक्रोबियल गुण होते है, इसलिए इसे गर्म दूध के साथ लेने से दमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों में कफ और साइनस जैसी समस्याओं में आराम होता है। यह मसाला आपके शरीर में गरमाहट लाता है और फेफड़े तथा साइनस में जकड़न से तुरन्त राहत मिलती है। साथ ही यह बैक्टीरियल और वायरल संक्रमणों से लड़ने में मदद करता है

2 मोटापा कम करें : हल्दी वाले दूध को पीने से शरीर में जमी अतिरिक्त चर्बी घटती है। इसमें मौजूद कैल्शियम और मिनिरल और अन्‍य पोषक तत्व वजन घटाने में मदगार होते है।

3 हडि्डयों को मजबूत बनाये : दूध में कैल्शियम और हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट की मौजूदगी के कारण हल्दी वाला दूध पीने से हडि्डयां मजबूत होती है और साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। हल्दी वाले दूध को पीने से हड्डियों में होने वाले नुकसान और ऑस्टियोपोरेसिस की समस्‍या में कमी आती है ।

4 खून साफ करें : आयुर्वेदिक परम्‍परा में हल्‍दी वाले दूध को एक बेहतरीन रक्त शुद्ध करने वाला माना जाता है। यह रक्त को पतला कर रक्त वाहिकाओं की गन्दगी को साफ करता है। और शरीर में रक्त परिसंचरण को मजबूत बनाता है।

5 पाचन संबंधी समस्‍याओं में लाभकारी : हल्‍दी वाला दूध एक शक्तिशाली एंटी-सेप्टिक होता है। यह आंतों को स्‍वस्‍थ बनाने के साथ पेअ के अल्‍सर और कोलाइटिस के उपचार में भी मदद करता है। इसके सेवन से पाचन बेहतर होता है और अल्‍सर, डायरिया और अपच की समस्‍या नहीं होती है।

6 दर्द कम करें : हल्दी वाले दूध के सेवन से गठिया का निदान होता हैं। साथ ही इसका रियूमेटॉइड गठिया के कारण होने वाली सूजन के उपचार के लिये प्रयोग किया जाता है। यह जोड़ो और मांसपेशियों को लचीला बनाता हकै जिससे दर्द कम हो जाता है।

7 गहरी नींद में सहायक : हल्‍दी शरीर में ट्रीप्टोफन नामक अमीनो अम्ल को बनाता है जो शान्तिपूर्वक और गहरी नींद में सहायक होता है। इसलिए अगर आप रात में ठीक से सो नहीं पा रहें है या आपको बैचेनी हो रही है तो सोने से आधा घंटा पहले हल्दी वाला दूध पीएं। इससे आपको गहरी नींद आएगी और नींद ना आने की समस्या दूर हो जाएगी।


 

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