Shayari in Hindi

बेशक खूबसूरत तो वो आज भी है,लेकिन चेहरे पर वो मुस्कान नहीं,जो हम लाया करते थे…!


सीख नहीं पा रहा हूँ मीठे झूठ बोलने का हुनर..

कड़वे सच ने हमसे न जाने कितने लोग छीन लिए….


दिल के जज़्बात ,
दिमाग़ की सोच को ,
धुँधला कर देते है !!!


तुम दुआ के वक्त जरा मुझको भी बुला लेना,
दोनो मिलकर एक दुसरे को मांग लेंगे


जिंदगी में प्यार क्या होता है वो उस शख्स से पूछो,
जिसने दिल टूटने के बाद भी इंतजार किया हो !!


हर दर्द का इलाज,

नहीं दवाख़ाने में |

कुछ दर्द चले जाते है,

सिर्फ़ मुस्कुराने में ||


 

याद रखने के लिए आपकी कोई चीज चाहिए,
आप नहीं तो आपकी तस्वीर चाहिए,
आपकी तस्वीर हमारा दिल बहला न सकेगी,
क्योकि वो आपकी तरह मुस्कुरा न सकेगी!!!


“ हाथों ” ✋?की लकीरों के……..
                     फरेब में मत आना……
क्यों कि …
ज्योतिषों की दूकान पर
                   मुक्कदर नहीं बिकते…..!!

जंगल जंगल ढूंढ रहा है ,
मृग अपनी “कस्तूरी ” को ।
कितना मुश्किल है तय करना,
“खुद से खुद ” की दूरी को ।

चल हो गया फ़ैसला,
कुछ कहना ही नहीं,
तू जी ले मेरे बग़ैर,
मुझे जीना ही नहीं..


 

सारी उम्र पूजते रहे लोग अपने हाथ से बने उस पत्थर के खुदा को…..हमने खुदा के हाथ से बने हुए एक को चाहा तो हम गुनहगार हो गए..


 

वो अनजान चला है
जन्नत को पाने की खातिर…!!

बेख़बर को इत्तला कर दो की
माँ-बाप घर पर ही है…!!


 

चलो! थोड़ी मुस्कुराहट बाँटते है..
थोड़ा दुख तकलीफों को डाँटते है..
क्या पता ये साँसे चोर कब तक हैं?
क्या पता ‘जिन्दगी की चरखी’ में ड़ोर कब तक हैं?


 

किसी व्यक्ति की आलोचना करने से पहले
खुद तसल्ली कर लो कि

क्या आप उसकी मदद करने का ज़िगर रखते हो.


 

कुछ ऐसे हो गए हैं,
इस दौर के रिश्ते…

जो आवाज़ हम ना दे,
तो बोलते वो भी नहीं…


 

 

कैसे कह दूं की महंगाई बहुत है। मेरे शहर के चौराहे पर आज भी एक रूपये मे कई दुआएँ मिलती है!!!!

 


कोशिश बहुत थी कि, राज -ए- मोहब्बत बयां न हो।

पर मुमकिन कहाँ था, कि आग लगे और धुआँ न हो।।


हर ‘बादशाह’ का भी एक ‘वक्त’ होता है,
.
.
और हर ‘वक्त’ का एक ‘बादशाह’ होता है ! !


 

ज्यादा शब्द नहीं मेरे पास जिंदगी को लुभाने के लिए

हम तो जी रहे है बस जिंदगी को आजमाने के लिए


 

“”वफ़ा”” सीखनी है तो “मौत” से सीखो “जो एक
बार “अपना” “बना” ले तो फिर “किसी” और का
होने नही देती !!


 

सबकुछ झूठ है फिर भी कितना सच्चा लगता है,
जानबूझकर धोखा खाना कितना अच्छा लगता है..!!


उलझनों और कश्मकश में..
उम्मीद की ढाल लिए बैठा हूँ..

ए जिंदगी! तेरी हर चाल के लिए..
मैं दो चाल लिए बैठा हूँ |

लुत्फ़ उठा रहा हूँ मैं भी आँख – मिचोली का …
मिलेगी कामयाबी, हौसला कमाल का लिए बैठा हूँ l

चल मान लिया.. दो-चार दिन नहीं मेरे मुताबिक..
गिरेबान में अपने, ये सुनहरा साल लिए बैठा हूँ l

ये गहराइयां, ये लहरें, ये तूफां, तुम्हे मुबारक …
मुझे क्या फ़िक्र.., मैं कश्तीया और दोस्त… बेमिसाल लिए बैठा हूँ…


 

माला की तारीफ़ तो करते हैं सब,

क्योंकि मोती सबको दिखाई देते हैं……

काबिले तारीफ़ तो धागा है जनाब,

जिसने सब को जोड़ रखा है…..


 

यदि सफलता एक सुन्दर पुष्प? है

तो विनम्रता? उसकी सुगन्ध।

जिंदगी में जो चाहो हासिल कर लो, बस इतना ख्याल रखना

कि, आपकी मंजिल का रास्ता, लोगो के दिलों? को तोड़ता हुआ न गुजरे!


 

जिम्मेदारियां मजबूर कर देती हैं अपना शहर छोड़ने को, वरना कौन अपनी गली मे जीना नहीं चाहता…..

हसरतें आज भी खत लिखती हैं मुझे, पर मैं अब पुराने पते पर नहीं रहता ।।


ज़िन्दगी में सब लोग रिश्तेदार या
दोस्त बन कर ही नही आते …
.
.
.
.
बल्कि कुछ लोग ‘सबक’ बन कर भी आते हैं


 

समंदर बड़ा होकर
भी अपनी हदों में रहता है..


इंसान छोटा होकर भी
‘औकात भूल जाता है.


जीवन तन्हा रास्ता है,
दो कदम का वास्ता है..

एक अंधेरे का मुसाफिर,
सबको दीपक बांटता है…


 

तुम लाख करलो
 नज़र अन्दाज़
 अपने हिजाब से,
पर हमने सिर्फ
मोहब्बत की है
अपने हिसाब से।


उससे रिश्ता
नहीं मगर फिर भी ,
कोई रिश्ता है
 तो बस उस से है.


तुम्हें बस रौशनी
नज़र आयी …..
?
मैंने कुछ घर
भी जलते देखे …..


आईना भी टूट कर
 कहं गया मुझे ,
?
तेरी ये झूठी मुस्कान
 अब बर्दाश्त नहीं होती …


मेरी दहलीज़ पर
 आ कर रुकी है
 हवा-ऐ-मोहब्बत..
?
मेहमान नवाज़ी का
 शौक भी है उजड़
 जाने का खौफ भी..


मैं इबादत खुद ही
 अपनी कर लूं तो
  क्या बुरा है,
किसी फ़कीर को
 कहते सुना था कि
मुझमें ही खुदा रहता है….l


रुठने का हक हैं तुझे,
पर वजह बताया कर…!!!
?
खफा होना गलत नहीं,
तू खता बताया कर..!!!


खुशनसीब कुछ
ऐसे हम हो जायें..
?
तुम हो हम हो और
 इश्क़ हो जायें….


मुझसे बातें
करके देखो,
?
मैं अक्सर तुम्हारी
 बातों में आ जाता हूँ..!!


दिल रोज सजता है,
नादान दुल्हन की तरह
 ?
गम रोज चले आते हैं,
 बाराती बनकर …


दुनिया को जलाने का
 इन्तज़ाम कर आए हैं….!!
?
तूँ जान है मेरी, ये सरेआम
कह आए हैं….!!!


बहुत प्यास है
 समंदर में।

यहाँ हर बूँद
खारी है।।


उसी से पूछ लो
उसके इश्क की कीमत..

हम तो बस
 भरोसे पे बिक गए…!


मेरे ही खून से रंगीं है
 दामने क़ातिल
मेरा ही क़त्ल हुआ है
 मगर मै जिंदा हूँ


‎हमारे‬ जैसे ‪‎बर्बाद‬ दिलो ‪का‬
जीना  ‎क्या‬ और ‪‎मरना‬ क्या ..

‪आज‬ तेरी ‪‎महफिल‬ से ‪‎उठे‬ हैं
‪‎कल‬ दुनिया ‪से‬ उठ ‪‎जाएंगे‬…!!!


होने “दो..?
तमाशा मेरी भी
 “जिदंगी का ….

बहुत “तालियाँ बजायी
 थी मैंने भी
 “सर्कस” में जाकर? !


 

~ ~ खूबसूरत है वो लब…… जिन पर,
दूसरों के लिए कोई दुआ आ जाए !!

~ ~ खूबसूरत है …………वो दिल जो,
किसी के दुख मे शामिल हो जाए !!

~ ~ खूबसूरत है………. वो जज़बात जो,
दूसरो की भावनाओं को समझ जाए !!

~ ~ खूबसूरत है…… वो एहसास जिस मे,
प्यार………. … की मिठास हो जाए !!

~ ~ खूबसूरत है…………. …………… .
वो बातें जिनमे,
शामिल हों दोस्ती और प्यार
की किस्से,
कहानियाँ !!

~ ~ खूबसूरत है………. वो आँखे जिनमे,
किसी के खूबसूरत ख्वाब समा जाए !!

~ ~ खूबसूरत है ………वो हाथ जो किसी के,
लिए मुश्किल के वक्त सहारा बन जाए !!

~ ~ खूबसूरत है……….वो सोच जिस मैं,
किसी कि सारी…… ख़ुशी छुप जाए !

~ ~ खूबसूरत है…………. …. वो दामन जो,
दुनिया से किसी के गमो को छुपा जाए !

~ ~ खूबसूरत है…….वो आसूँ जो,
किसी और के गम मे बह जाए . .


 

खुशी के लिए काम करोगे तो
शायद ख़ुशी कभी नहीं मिलेगी ..

लेकिन

अगर खुश होकर काम करोगे तो
ख़ुशी और सफलता दोनों ही मिलेगी !


 

रास्ते में हमसे रो रो के
पुछा पाँव के छालों ने..

बस्ती कितनी दूर बसा ली
दिल में बसने बालों ने….


कभी टूट कर बिखरो
 तो मेरे पास आजाना,

मुझे अपने जैसे लोग
 बहुत पसंद हैं……


मजा चख लेने दो उसको
 भी गैरों की महफ़िल का….!

इतनी चाहत के बाद वो मेरा
 न हुआ औरों का क्या होगा….!!


याद हमे जो करते है
उन्हे हम भुलते नही

जो भुला दे हमे उन्हे
 याद करते नही ..


“सुनों इतना
क़रीब आओ,

के सांसें
मशवरा कर ले!”


दर्द बेचते हैं हम यहाँ
 लफ्जों में ढाल कर

चोट पहुँचे तो गुस्ताखी
 माफ़ की जिएगा


गुज़रता ही नहीं
वो एक लम्हा…

इधर मैं हूँ कि
बीता जा रहा हूँ..!!


ना हुनर है ना फरेव है
कोई समझे कुछ भी।

यह मेरी अदा है जिस पर
कोई खफा तो कोई फिदा है।।


सुनो…!!

इतने सिकवे क्यू
करती हो मुझसे….!!

मैने कौनसी तुम्हारी
तकदीर लिखी है….!! 


आजमाना है
अगर मेरे ऐतबार को

तो एक झूठ तुम बोलो
 और फिर मेरा यकीन देखो


किसी इंसान का पहला
प्यार बनना कोई बड़ी

बात नहीं,बनना है,तो किसी
 का आखिरी प्यार बनो..


“पढ पढ किताबां इलम दियां,
तू नाम रख लेया काजी….
हथ विच फड़ के तलवार,
तू नाम रख लेया गाजी….
मक्के मदिना घुम के,
तू नाम रख लेया हाजी….
बुल्लेशाह हासिल की किता,
जे तू यार न रखया राजी”……..बुल्लेशाह


हद-ए-शहर से निकली तो गाँव गाँव चली,
कुछ यादें मेरे संग पांव पांव चली,
सफ़र जो धूप का किया तो तजुर्बा हुआ,
वो जिंदगी ही क्या जो छाँव छाँव चली। …


तकदीर लिखने वाले एक एहसान लिख दे,
मेरे दोस्त की तकदीर में मुस्कान लिख दे,
ना मिले जिन्दगी में कभी भी दर्द उसको,
चाहे उस की किस्मत में मेरी जान लिख दे.. …


बस तुम्हेँ पाने की तमन्ना नहीँ रही..
मोहब्बत तो आज भी तुमसे बेशुमार करतेँ हैँ.!!


कभी रजामंदी, तो कभी बगावत है इश्क..
मोहब्बत राधा की है, तो मीरा की इबादत है इश्क..!!


नहीं मांगता ऐ खुदा कि,जिंदगी सौ साल की दे..
दे भले चंद लम्हों की, लेकिन कमाल की दे..!!!


 

मत शिक्षा दो इन बच्चों को चांद-सितारे छूने की।
चांद- सितारे छूने वाले छूमंतर हो जाएंगे।
अगर दे सको, शिक्षा दो तुम इन्हें चरण छू लेने की,
जो मिट्टी से जुङे रहेंगे, रिश्ते वही निभाएंगे।


 

अजीब सी बस्ती में ठिकाना है मेरा
जहाँ लोग मिलते कम झांकते ज़्यादा है


 

बात मुक्कदर पे आ के रुकी है वर्ना,
कोई कसर तो न छोड़ी थी तुझे चाहने में !


 

किसी को क्या बताये की कितने मजबूर है हम..
चाहा था सिर्फ एक तुमको और अब तुम से ही दूर है हम।


 

वहां तक तो साथ चलो जहाँ तक साथ मुमकिन है,
जहाँ हालात बदलेंगे वहां तुम भी बदल जाना.


 

दुआएँ को इकठ्ठा करने में लगा हूँ आजकल ,

सुना है दौलत और शोहरत साथ नही जाते..!


 

इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है….?
लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर..


ठोकरें खा कर भी ना संभले
तो मुसाफ़िर का नसीब;

वरना पत्थरों ने तो अपना
फर्ज़ निभा ही दिया है ।


“यहाँ मेरा कोई अपना नहीं है”

“चलो अच्छा है यहाँ कुछ ख़तरा भी नहीं है”


मेरी तुम बेबसी देखो…….
मुझे तुम से मोहब्बत
के सिवा कुछ नहीं आता…..


मेरी खामोशियो
का कोई मोल नहीं,
उनकी जिद्द की
कीमत ज्यादा है! !


 

एक ठहरा हुआ दरिया है
मेरी आँखों में !

जाने किस घाट पे मारेगी
तेरी प्यास मुझे…….!!


किसी के पास आते हैं
तो दरिया सूख जाते हैं

किसी की एड़ियों से
रेत में चश्मा निकलता है


सर को सजदे भी
अता कर मेरे मौला

आँखों से तो यह क़र्ज़
अदा हो नहीं सकता।


बस तू मेरी आवाज़
में आवाज़ मिला दे

फिर देख की इस शहर
में क्या हो नहीं सकता.


दहलीज़ पे रख दी हैं
किसी शख़्स ने आँखें

रौशन कभी इतना तो
दिया हो नहीं सकता.


मैंने रोते हुए पोंछे थे
किसी दिन आँसू
मुद्दतों माँ ने नहीं
धोया दुपट्टा अपना


कल छत पे न
चली आना तुम

खुदा ने अमावस
तय की है…….


मत कर हिसाब तू रहने दे,
तेरी ना सही मेरी ही
आँखों में बेहिसाब
प्यार रहने दें !


बहुत कुछ बदला हैं मैने अपने आप में,
लेकिन…?
तुम्हें वो टूट कर चाहने की आदत
अब तक नहीं बदली


फिर कोई जख्म मिलेगा तैयार रह, ऐ दिल ?

कुछ लोग फिर पेश आ रहे हैं बहुत प्यार से


 

सब ने पैसा तो बहुत कमा लिया
पर उस पैसे का क्या मोल है !!
अपनो का प्यार और अपनो से रिश्ता
इन पैसोँ से कही अधिक अनमोल है !


 

भरोसा खुद पर रखो तो ताकत बन जाती है,
और
दूसरों पर रखो तो कमजोरी बन जाती है…


बेजान चीज़ो को बदनाम करने के
तरीके कितने आसान होते है….!
लोग सुनते है छुप छुप के बाते ,
और कहते है के दीवारो को भी कान होते हैं…!!


 

” जो दिल को अच्छा लगता है,
उन्ही को अपना कहता हूँ,
मुनाफ़ा देखकर रिश्तों की,
सियासत मैं नही करता।”…..


समंदर से भी गहरी है,
मेरे यार की आँखें….!!

नदियों से भी लहरी है,
मेरे दिलदार की आँखे,

खो जाता हूँ इन नैन में,
जो फूल सी सुन्दर है
मेरे प्यार की आँखे..!!

कभी उठता हूँ, कभी गिरता हूँ
जाम से भी नशीली है,
मेरे जाने बहार की आँखे.

जल जाता हूँ इन बहारों में,
ज्वाला मुखी से भी तेज़ है,
मेरे दिलबहार की आँखे….!

डूब जाता हूँ इन नज़रों मैं,
ऐसी है मेरे तलबदार की आँखे


बस यही दो मसले, ज़िन्दगी भर ना हल हुए,
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए,
वक़्त ने कहा…..काश थोड़ा और सब्र होता,
सब्र ने कहा….काश थोड़ा और वक़्त होता !


 

रात को उठ ना सका दरवाजे की दस्तक पे,
सुबह बहुत रोया तेरे पैरों के निशां देख कर


अगर ‘मोहब्बत’ उनसे ना मिले जिनसे आप प्यार करते हो…?

तो फिर ‘मोहब्बत’ उनको ज़रूर देना जो आपसे प्यार करता है.


इश्क़ वो है,
जब मैं शाम होने पर मिलने का वादा करूँ,
और वो दिन भर… सूरज के होने का अफ़सोस करे


तेरी तो फितरत थी सबसे मुहब्बत करने की,
हमने बेवजह खुद को खुशनसीब समझा.


मेरे मिज़ाज को समझने के लिए, बस इतना ही काफी है, मैं उसका हरगिज़ नहीं होता?जो हर एक का हो जाये


हम उनसे तो लड़ सकते है जो खुले आम दुश्मनी रखते है..?
पर उनका क्या करे जो साथ रहकर वार करते हैं..


मत किया कर ऐ दिल किसी से मोहब्बत इतनी,जो लोग बात नहीं करते वो प्यार क्या करेंगे..


तु मुझे छोड़कर चली गई..
इसका मुझे कोई दुख नहीं…..


जब से उसने बारिश में मेरे साथ भीगना छोड़ दिया …?
बादलों ने शहर में बरसना ही छोड़ दिया


नफरत मत करना मुझसे बुरा लगेगा….?बस प्यार से कह देना….अब तेरी जरूरत नहीं है…?


ये बेफिक्र सी सुबह,

गुनगुनाहट शामों की…

ज़िन्दगी खूबसूरत है,
गर ………..

आदत हो मुस्कुराने की..!!


मूर्ति बेचने वाले गरीब कलाकार के लिए,
किसी ने क्या खूब लिखा है….

गरीबो के बच्चे भी खाना खा सके त्योहारों में,
इसिलिये भगवान खुद बिक जाते है बाजारों में….


” खुदा करे दोनों सलामत रहे हमेशा “
” एक तुम और दूसरा तुम्हारा मुस्कुराना “


ये बेफिक्र सी सुबह,

गुनगुनाहट शामों की…

ज़िन्दगी खूबसूरत है,
गर ………..

आदत हो मुस्कुराने की..!!


शाम को थक कर टूटे झोपड़े में सो जाता है वो मजदूर, जो शहर में ऊंची इमारतें बनाता है….


अमीर की बेटी पार्लर में जितना दे आती है, उतने में गरीब की बेटी अपने ससुराल चली जाती है….


कल एक इन्सान रोटी मांगकर ले गया और करोड़ों कि दुआयें दे गया, पता ही नहीँ चला की, गरीब वो था की मैं….


दीदार की तलब हो तो नजरें जमाये रखना ..क्यों कि ‘नकाब’ हो या ‘नसीब’ सरकता जरूर है”…


गठरी बाँध बैठा है अनाड़ी

साथ जो ले जाना था वो कमाया ही नहीं


मैं उस किस्मत का सबसे पसंदीदा खिलौना हूँ, वो रोज़ जोड़ती है मुझे फिर से तोड़ने के लिए….


जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..


बचपन भी कमाल का था

खेलते खेलते चाहें छत पर सोयें या ज़मीन पर, आँख बिस्तर पर ही खुलती थी…


हर नई चीज अच्छी होती है लेकिन दोस्त पुराने ही अच्छे होते है….


ए मुसीबत जरा सोच के आ मेरे करीब कही मेरी माँ की दुवा तेरे लिए मुसीबत ना बन जाये….


खोए हुए हम खुद हैं, और ढूंढते भगवान को हैं…


अहंकार दिखा के किसी रिश्ते को तोड़ने से अच्छा है की,माफ़ी मांगकर वो रिश्ता निभाया जाये….


जिन्दगी तेरी भी, अजब परिभाषा है..सँवर गई तो जन्नत, नहीं तो सिर्फ तमाशा है…


खुशीयाँ तकदीर में होनी चाहिये, तस्वीर मे तो हर कोई मुस्कुराता है…


हम तो पागल हैं शौक़-ए-शायरी के नाम पर ही दिल की बात कह जाते हैं और कई इन्सान गीता पर हाथ रख कर भी सच नहीं कह पाते है…


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